Tag - रांची

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जैन मुनि की हत्या का विरोध : जैन समाज ने दिया राज्यपाल को ज्ञापन 

प्रसिद्ध जैनाचार्य 108 श्री कामकुमार नन्दी जी महाराज की नृशंस हत्या के विरोध में जैन समाज रांची के एक प्रतिनिधि मंडल ने झारखंड के राज्यपाल सी.पी .राधाकृष्णन जी...

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आर्यिका विभाश्री माताजी ने वाणी संयम के बारे में बताया : अपनी वाणी से हित-मित-प्रिय वचन बोलना चाहिए

गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि अपने शौक के लिये किसी को शोक में नहीं डालना चाहिए। हम अपने शौक के लिए जीव जन्तुओं की हिंसा करते हैं ।...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन उपासना: समर्पण एवं भावना से आराधना की उत्पत्ति होती है – आर्यिका विभाश्री 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने कहा कि जो अपने परिवार के साथ भगवान की पूजा करते हैं, वे तीर्थंकर के कुलों में उत्पन्न होते हैं...

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आर्यिका विभाश्री का चातुर्मासिक प्रवचन : जीवन के कर्मो का फल सबको भोगना है 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि अपने अंदर खोजना है कि कैसे हमारी आत्मा बुरे परिणामों को कर हमें दुखी...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : अहंकार और आलस्य पतन का भाव उत्पन्न करते है – आर्यिका विभाश्री

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि आत्मा के शांत समुंद्र में जो राग-द्वेष रूपी लहरें उठती हैं, यही हमारे...

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श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान : अर्घ्य मंत्रोच्चार के साथ चढ़ाए गए

श्री दिगंबर जैन मंदिर, भागलपुर में जैन संत परम पूज्य मुनि श्री 108 विशल्य सागर मुनिराज ससंघ में सानिध्य में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे वलय के...

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आर्यिका विभाश्री माताजी के चातुर्मासिक प्रवचन : प्रत्येक जीव के अपनी-अपनी कषायों के कारण अनन्त प्रकार के परिणाम

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि प्रत्येक जीव के अपनी-अपनी कषायों के कारण अनन्त प्रकार के परिणाम हो सकते...

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कर्म का प्रतिफल हमें ही भोगना पड़ता है: आर्यिका विभाश्री ने प्रवचन में कर्म के बारे में बताया 

यदि हम किसी से ईर्ष्या करते हैं, किसी का बुरा सोचते हैं तो हमें पाप का बंध अवश्य होगा। धर्म वर्जिता स्वयं धर्म नहीं करता, जो अपने अधीन है उसको भी धर्म नहीं...

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आर्यिका विभा श्री की धर्मसभा : देख दूसरों की बढ़ती को कभी न ईर्ष्या भाव धरूं रहें भावना ऐसी मेरी, सरल सत्य व्यवहार करूं

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा मन जाये तो जान दे, तू मत जाए शरीर। रसरी डरी कमान में, काह करेगा तीर। ज्ञान...

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चातुर्मासिक सभा में दिए प्रवचन : चरण स्पर्श की परंपरा आचरण स्पर्श की परंपरा को मजबूत बनाती हैं – आर्यिका विभा श्री 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी के सानिध्य में प्रातः जिनसहस्त्रनाम धारा एवं पारिवारिक पूजन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। पूज्य माता...

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