Tag - मुनिश्री विलोकसागरजी

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व्यसन करने वाला धार्मिक अनुष्ठान करने का पात्र नहीं : मुनिश्री विलोकसागर’जी ने व्यसनों को त्यागने का दिया उपदेश

व्यसन करने वाले को सभी जगह हेय दृष्टि से देखा जाता है, ऐसा व्यक्ति सर्वत्र निंदा का पात्र बनता है। यह उद्गार मुनि श्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़ा जैन मंदिर में...

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साधु संतों के सानिध्य से विकार होते हैं नष्ट : जैन मंदिर में नित्य होते हैं मुनिराज जारी हैं प्रवचन

वर्षायोग के चार माह धर्म ध्यान, पूजन, तप, स्वाध्याय, भक्ति एवं साधना के लिए सबसे उत्तम समय रहता है। इस समय का सभी श्रावकों को सदुपयोग करना चाहिए। इस अवसर पर...

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जैन दर्शन का मूल आधार अहिंसा : मुनिश्री विलोकसागरजी दे रहे हैं संयम साधना के संस्कार

मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोध सागर जी महाराज द्वारा कक्षाओं के माध्यम से पूर्व आचार्यो द्वारा रचित ग्रंथों का पठन- पाठन चल रहा है।मुरैना से...

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जैन दर्शन में अहिंसा धर्म का पालन ही चातुर्मास है : मुनिराजों ने बड़े जैन मंदिर में किया चातुर्मास प्रतिष्ठापन

श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में विराजमान मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विवोधसागरजी महाराज ने श्री जिनेंद्र भगवान के समक्ष भक्ति एवं...

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शिक्षण शिविर में बच्चों को किया गया सम्मानित : प्रशिक्षण देने वाले विद्वानों का भी किया सम्मान

ग्रीष्मकालीन अवकाश में बच्चों को संस्कारवान बनाने एवं अपनी संस्कृति से परिचित कराने के लिए 10 दिवसीय संस्कार शिविर बड़े जैन मंदिर में लगाए गए। समाज के श्रेष्ठी...

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धर्म की आराधना से जीवन पवित्र हो जाता है : मुनिश्री विलोकसागरजी ने सिद्धचक्र विधान में धर्म के प्रभाव पर प्रकाश डाला

बड़े जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 512 अर्घ्य समर्पित किए गए। इस अवसर पर मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि...

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