बड़े जैन मंदिर में धर्म सभा के दौरान मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने कहा कि सांसारिक जीवन में सुख और दुख का चक्र घूमता रहता है। जब हमारे अच्छे कर्म उदय में आते...
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सर्वप्रथम योग की शिक्षा आदि ब्रह्मा आदिनाथ भगवान ने दी थी। स्वयं आदिनाथ स्वामी ने योग धारण कर केवलज्ञान की प्राप्ति की थी। योग और ध्यान भारत की सबसे प्राचीन...
धर्म की रक्षा करना, उसके सिद्धांतों और संयम के मार्ग पर चलने वालों का सहयोग करना ही सच्चा धर्म है। धर्म किसी जड़ वस्तु का नाम नहीं, बल्कि चेतना का स्वरूप है।...
मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित किया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में समाजजन, श्रद्धालु मौजूद रहे। 22 मई को तीर्थंकर भगवान...








