Tag - धर्मसभा

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : शोधन करके ध्यानपूर्वक भोजन करो- आर्यिका विज्ञानमति माताजी

आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने प्रवचन के दौरान कहा कि जब तक जीव के अनंतानुबंधी क्रोध, मान, माया, लोभ समाप्त नहीं होती तब तक सम्यगदर्शन रूपी सूर्य का उदय नहीं...

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प्रवचन के माध्यम से बताया आहारदान का महत्व : बरसात, हवा, कर्म और साधु कब आ जाए, पता नहीं – मुनिश्री सुधासागर

जब आप मकान बनवाते हैं तो उसमें विभिन्न विषयक अलग-अलग कमरे बनवाते हैं लेकिन आप साधुओं के लिए आहारशाला या स्वाध्याय के लिए अलग से कमरा नहीं बनवाते। दिगम्बर साधु...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : अहंकार और आलस्य पतन का भाव उत्पन्न करते है – आर्यिका विभाश्री

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि आत्मा के शांत समुंद्र में जो राग-द्वेष रूपी लहरें उठती हैं, यही हमारे...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है- आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज

आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज अपने चातुर्मासिक प्रवास के दौरान श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हम किसी से ईर्ष्या करते हैं, किसी का बुरा सोचते हैं, तो...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : भक्तामर के 12वें काव्य का बताया महत्व

धर्मसभा में आचार्य श्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि जो जितना परिग्रह रखता है, उसे उतने ही विकल्प ज्यादा आते हैं। जगत के संकल्प ही विकल्पों का जनक है। यदि...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : समग्र जैन समाज तुम्हारा सधर्मी परिवार – आचार्य विहर्ष सागर

दुनिया में जैन समाज 1% है लेकिन सब पर भारी है क्योंकि जैनों के साथ देव शास्त्र गुरु का आशीर्वाद है। यह उद्गार गुरुवार को आचार्य श्री विहर्षसागर जी महाराज ने...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : भक्तामर के 11वें काव्य का बताया महत्व

धर्मसभा में आचार्य श्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि देह को कृष करने वाले धर्म बहुत जन करते हैं, लेकिन तत्व का निर्णय करके तप करना वास्तविक तपस्या है। जिसने तन...

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जैन संत की निर्मम हत्या पर आक्रोश सर्वसमाज द्वारा ललितपुर बंद 20 जुलाई को : संत समाज की धरोहर जिनकी सुरक्षा संरक्षण का नैतिक दायित्व- विनम्रसागर

कर्नाटक में हाल ही में जैन संत की निर्मम हत्या भारतीय संस्कृति पर कुठाराघात है। ऐसी घटना किसी साधु के प्रति कभी सुनने में नहीं आई। संत न होते समाज में तो क्या...

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चातुर्मासिक धर्म सभा में प्रवचन : उपाध्याय श्री विहसंत सागर ने बताया भक्तामर के दसवें काव्य का महत्व

प्रातः कालीन क्रीम क्लास में मुनिवर विहसंत सागर महाराज ने यह बताया कि तीर्थंकरों के 34 अतिशयों में केवलज्ञान के दस अतिशय होते हैं, जो घातिकर्म के क्षय होने पर...

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चातुर्मासिक धर्म सभा में प्रवचन : भगवान व्यापारी नहीं हैं, उनसे कुछ मत मांगो -आचार्य विहर्ष सागर महाराज

राष्ट्रसंत आचार्य श्री विहर्षसागरजी महाराज ने मोदी जी की नसियां में बुधवार को सम्यक दर्शन पर प्रवचन देते हुए कहा कि सम्यक दृष्टि और मिथ्या दृष्टि दो प्रकार के...

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