सरे काल में 14 कुलकर, 10 कल्पवृक्ष होते हैं और प्रथम के तीन काल भोगभूमि के काल होते हैं। जो भी इस चतुर्थ व पंचम काल में आश्चर्यजनक घटना हुई है, वह सब होंण्डा...
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आर्यिकारत्न विज्ञानमति माताजी ने धर्मसभा में श्रावकजन को संबोधित करते हुए कहा कि समरंभ, समारंभ, आरम्भ हिंसादि से युक्त कोई भी कार्य करने के लिए प्रयत्नशील...
जैनाचार्य श्री विनिश्चयसागर महाराज ने धर्मसभा को किया संबोधित : बिना योजना के जीवन सुखी नहीं हो सकता
किसी भी कार्य को सफलता पूर्वक संचालन के लिए योजना बनाई जाती है । बिना योजना बनाए किसी भी कार्य को करना सफलता की गारंटी नहीं हैं । कहने का तात्पर्य यह हैं कि...
उदयनगर में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए...
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामंदिर में उच्चारणाचार्य विनम्रसागर महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि सबसे सरल कार्य है प्रभु की भक्ति करना। इसमें...
चातुर्मास में कलश वह माध्यम है, जिससे श्रावक अपने आपको चातुर्मास से जुड़ा हुआ महसूस करता है। यह विचार आचार्य श्रीविनिश्चयसागर जी महाराज ने चातुर्मास कलश...
आचार्य श्री आर्जवसागरजी महाराज ने भव्य समारोह में अपने मंगल चातुर्मास की स्थापना मंत्रोच्चार के साथ की। उन्होंने इस दौरान कहा कि नारियल ऊपर से कठोर दिखाई देता...
आर्यिकारत्न विज्ञानमति माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जो मुनिराज अंतरंग से जिन लिंग धारी हैं। पांच समितियां और पांच महाव्रत का पालन करते हैं वह...
आचार्य श्री 108 उदारसागर जी महाराज ससंघ का चातुर्मास श्री दिगंबर जैन मंदिर, तिलकगंज, सागर में कलश स्थापना के साथ, धर्म प्रभावना पूर्वक प्रारंभ हुआ। कलश स्थापना...
उदयनगर में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए...








