वात्सल्य वारीधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के शिष्य मुनिश्री अपूर्व सागर जी महाराज ने कहा कि वीतराग धर्म, आत्मधर्म, केवली भगवान द्वारा कहा गया धर्म...
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मुनि श्री अपूर्व सागर ने चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिन धर्म, वीतराग धर्म, सुख की खान है। यह सभी का हित करने वाला होता...
मुनि श्री अपूर्व सागर ने चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिन धर्म, वीतराग धर्म, सुख की खान है। यह सभी का हित करने वाला होता...
जीव दया का पालन करने के लिए पानी छानकर ही उपयोग में लेना चाहिए। वैज्ञानिकों ने भी अनछने पानी की एक बूंद में 36450 जीवों की संख्या बताई है। वैज्ञानिकों ने यह...
संकल्प करने से अपने आप में शक्ति आती है और कार्य सफल होते हैं। जीवन में मुख्यतया ये शक्तियां काम करती हैं और उत्साह लाती हैं- संकल्प, साहस और संगठन। उक्त विचार...
भक्ति का मतलब होता है पूज्य पुरुषों और गुणवान पुरुषों के गुणों का स्मरण करना, याद करना, उनके गुणों का बखान तथा उनके जैसे गुणों को प्राप्त करने का प्रयत्न करना...
दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य वर्धमानसागर के संघस्थ मुनि अर्पित सागर ने धर्म उपदेश देते हुए कहा कि यह शरीर क्या है, जो जीर्ण होता है और जो शरीर नाम कर्म के उदय...
भगवान की स्तुति करना अनंत फलदायक होती है। भाव की विशुद्धि के साथ गुणवान पुरुष के गुणों को कहना भक्ति कहलाता है। प्रत्येक मनुष्य को स्तवन करना चाहिए। स्तवन का...
वात्सल्य वारिधि, संत शिरोमणि आचार्य 108 श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के शिष्य क्षुल्लक 105 श्री महोदय सागर जी महाराज का आज सायं मऊ अतिशय क्षेत्र में रात्रि...
18 कोडाकोड़ी सागर के बाद इस हूंडावसर्पि काल में भगवान आदिनाथ के द्वारा ही जैन धर्म का प्रवर्तन किया।जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ने ही कृषि भूमि में असी...








