Tag - जैन धर्म सभा

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आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित सप्त ऋषि संघ का 55 वर्ष बाद शिवाड़ में हुआ भव्य मंगल प्रवेश : राग–द्वेष और मोहनीय कर्म का त्याग करने पर ही मिलता है ‘शिव’ अर्थात मोक्ष मार्ग: आचार्यश्री

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित सप्त ऋषि संघ का 55 वर्षों बाद शिवाड़ में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। धर्मसभा में आचार्यश्री ने राग, द्वेष, क्रोध, मान, माया...

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मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज बोले – “रोटी साधु के पीछे घूम रही है, मनुष्य को अपनी सोच बदलनी होगी : दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि श्री के प्रवचनों से गूंजी आत्मजागरण की भावना

दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में चल रही प्रवचनमालाओं में आज उन्होंने जीवन की गूढ़ सच्चाइयों पर प्रकाश डाला। मुनि...

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उत्तम शौच धर्म के साथ परयूषण का चौथा दिवस मनाया : भगवान पुष्पदंत का मोक्ष कल्याणक, मंदिरों में चढ़ाए निर्वाण लाडू

धामनोद (बड़वानी) – परयूषण पर्व के चौथे दिवस को उत्तम शौच धर्म के रूप में मनाया गया। इस दिन भगवान पुष्पदंत का मोक्ष कल्याणक बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।...

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आचार्य श्री विशद सागर जी के ससंघ सान्निध्य में हुई भक्तिामर बीजाक्षर महा आराधना : मुनि श्री विशाल सागर जी कर रहे हैं एकांतर तप साधना

इंदौर सुदामानगर में आचार्य श्री विशद सागर जी ससंघ के सान्निध्य में भक्तिामर बीजाक्षर महा आराधना का आयोजन हुआ। पाटनी परिवार के सौजन्य से 2688 दीपकों से यह...

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संत समागम में आचार्य वर्धमान सागर जी ने कहा – रागी को बैरागी बनाने का सूत्र धर्म है : प्रथमाचार्य शांतिसागर जी के योगदान को याद कर दी आचार्य भक्ति की प्रेरणा

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने संत समागम के दौरान धर्म को रागी से बैरागी बनने का मार्ग बताया। प्रथमाचार्य शांतिसागर जी महाराज के अविस्मरणीय योगदानों का...

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संस्कारों से ही संस्कृति रहेगी सुरक्षित : आचार्य श्री निर्भयसागरजी ने कहा – संत के साथ जुड़ा व्यक्ति कभी अधर्म नहीं कर सकता

ललितपुर के पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में विराजमान वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भयसागर जी महाराज ससंघ ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृति का संरक्षण...

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विनयशील बने, ऊँचाइयाँ पाएं : पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी बोले-विनय आत्मिक गुण है, गुरु कृपा पाने का सरल मार्ग है

विरागोदय तीर्थ पथरिया में आयोजित धर्मसभा में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने विनय के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विनम्रता ही उन्नति का द्वार है...

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