Tag - कुंडलपुर

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प्रवचन : जैसा होता है बांस, वैसी ही बनती है बांसुरी : मुनि श्री निरंजनसागर

अशुद्ध कारण से कभी त्रिकाल में भी शुद्ध कार्य घटित नहीं हो सकता है। बिना कारण के भी कोई कार्य संपन्न नहीं होता और कारण के होते पर भी कार्य हो जाए, यह भी आवश्यक...

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दृष्टि अपने आप भी मिल सकती है – आचार्य श्री विद्यासागार जी

कुण्डलपुर पहुंचे 200 से अधिक संत दमोह। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने रविवार को कुण्डलपुर में अपने प्रवचनों में कहा कि दृष्टि हमें बड़ों से भी मिलती है और...

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