उस समय समवशरण की रचना का वर्णन आता है जिससे तीर्थंकर भगवान धर्म देशना देते हैं। वर्तमान में समवशरण नहीं है, अब जिनालय का निर्माण किया जाता है। यह मंगल देशना...
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टोंक नगर की धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रथमाचार्य श्री वीर सागर जी के 68वें समाधि वर्ष पर विशेष पूजन एवं गुणानुवाद के अवसर पर प्रवचन दिया।...
दसलक्षण पर्व के छठे दिन आचार्य वर्धमान सागर जी ने कहा कि आत्मा की उन्नति और तीर्थंकर पद की प्राप्ति के लिए संयम रूपी ऊर्जा शक्ति अत्यंत आवश्यक है। संयम जीवन का...
दिगम्बर जैन मुनि परंपरा के पुनरुद्धारक प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पुण्य स्मृति में पद-शताब्दी महोत्सव आयोजित हुआ। उनके तप, त्याग और संयम से...
आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज जी के 55वे संयम वर्ष वर्धन दिवस पर विशेष (संयम दीक्षा दिवस – फागुन कृष्णा 8 अष्टमी, 24 फरवरी 1969) आपका व्यक्तित्व...








