आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने जावद में विराजित रहकर मंगल देशना दी है। इसमें धर्म, ग्रंथ और ज्ञान का महत्व बताया। देव शास्त्र और गुरु की महिमा का बखान किया है।...
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आचार्यश्री वर्धमान सागरजी धरियावद विराजित हैं। नगर के व्यवसाई ने दीक्षा हेतु आचार्यश्री को निवेदन किया। आचार्यश्री ने पूजन के दौरान चढ़ाए जाने वाले द्रव्य किस...








