बड़वानी के जैन मंदिर में आर्यिका विकुंदन श्री माताजी ने धर्मसभा में कहा कि जीनागम के शास्त्रों का हर शब्द ज्ञान की खान है। मोह से मुक्त होकर संयम और सद्भाव के...
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सहस्त्रनाम मंडल विधान के दौरान आचार्य वर्धमान सागर जी ने बताया कि भगवान ने द्रव्य, भाव और नौ कर्म रूप तीन पुर — जन्म, जरा और मरण रूपी नगर को नष्ट किया है। पूजन...
मुनिश्री विनीत सागरजी ने आज धर्मसभा में प्रवचन करते हुए बताया कि मनुष्य को जो नर भव मिला व बहुत कठिनाई से मिला है। जिस प्रकार हम लोग मंदिर आते है। तीन लोक के...








