Tag - Vibhashri Mataji

समाचार

चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन : अच्छी संगति रखने से व्यक्तित्व निखर जाता है- आर्यिका विभाश्री 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि गलत स्थान पर पहुंच कर भी अपने मन को संभाल कर रखना बहुत कठिन होता है।...

समाचार

आर्यिका विभाश्री माताजी ने वाणी संयम के बारे में बताया : अपनी वाणी से हित-मित-प्रिय वचन बोलना चाहिए

गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि अपने शौक के लिये किसी को शोक में नहीं डालना चाहिए। हम अपने शौक के लिए जीव जन्तुओं की हिंसा करते हैं ।...

समाचार

आर्यिका विभाश्री का चातुर्मासिक प्रवचन : जीवन के कर्मो का फल सबको भोगना है 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि अपने अंदर खोजना है कि कैसे हमारी आत्मा बुरे परिणामों को कर हमें दुखी...

समाचार

आर्यिका विभाश्री माताजी के चातुर्मासिक प्रवचन : प्रत्येक जीव के अपनी-अपनी कषायों के कारण अनन्त प्रकार के परिणाम

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि प्रत्येक जीव के अपनी-अपनी कषायों के कारण अनन्त प्रकार के परिणाम हो सकते...

समाचार

कर्म का प्रतिफल हमें ही भोगना पड़ता है: आर्यिका विभाश्री ने प्रवचन में कर्म के बारे में बताया 

यदि हम किसी से ईर्ष्या करते हैं, किसी का बुरा सोचते हैं तो हमें पाप का बंध अवश्य होगा। धर्म वर्जिता स्वयं धर्म नहीं करता, जो अपने अधीन है उसको भी धर्म नहीं...

समाचार

आर्यिका विभा श्री की धर्मसभा : देख दूसरों की बढ़ती को कभी न ईर्ष्या भाव धरूं रहें भावना ऐसी मेरी, सरल सत्य व्यवहार करूं

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा मन जाये तो जान दे, तू मत जाए शरीर। रसरी डरी कमान में, काह करेगा तीर। ज्ञान...

समाचार

आर्यिका विभा श्री की धर्मसभा : इहलोक में एवं परलोक में ‘धर्म’ ही हमारा सच्चा मित्र है 

आर्यिका विभाश्री माताजी ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रवचन देते हुए कहा कि हमें यह ध्यान देना है कि हमें किन भावों से बचना है, जिससे क्रूरता हमारे अंदर...

समाचार

चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : अपराध बोध हुए बिना अपराध से मुक्ति पाना असम्भव- आर्यिका विभा श्री 

गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान कहा कि अपराध बोध हुए बिना अपराध से मुक्ति पाना असम्भव है। उन्होंने...

समाचार

चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : आत्मा में राग-द्वेष युक्त भावों का उत्पन्न होना हिंसा है- आर्यिका विभा श्री 

गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान कहा कि समुद्र का जल तो शांत होता है, उसमें हवा के द्वारा लहरें...

समाचार

इंद्रिय जनित विषय भोगों की आकांक्षा दुःख का कारण है और परिणामों की अत्यंत निर्मलता ही धर्म है : आर्यिका विभा श्री ने प्रवचन में कहा 

गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रवचन के दौरान कहा कि इंद्रिय जनित विषय भोगों की आकांक्षा दुःख का कारण है और परिणामों की...

You cannot copy content of this page