यूं ही नहीं आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज वात्सल्य वारिधि नहीं कहे जाते। गुरुदेव जिन शासन की वरिष्ठतम संतों में से एक हैं। उनका आशीष अपने संघ में विराजमान...
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टोंक में श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के दूसरे दिन नगर में आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा। भव्य जुलूस में हाथी, घोड़े और बग्गियों के साथ...
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने टोंक नगर की धर्मसभा में हेय और उपादेय के समीचीन ज्ञान को जीवन निर्माण का आधार बताया। प्रथम पट्टाचार्य वीर सागर जी का 68वां समाधि...
आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का संघ सहित धरियावद नगर से विश्व के सबसे छोटे शिखर वाले दिगंबर जैन श्री चंद्रप्रभु जिनालय, नंदनवन में प्रवेश हुआ। समंतभद्र विद्या...
वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागरजी 33 साधु सहित पारसोला में विराजित है। पारसोला दिगंबर जैन समाज अनन्य गुरुभक्त समाज है, जिन्होंने किए संकल्प वचन का...
पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने संघ के शिष्यों 15 साधुओं सहित गामड़ी में विराजित हैं। गामड़ी संघस्थ आर्यिकाश्री शीतलमतिजी की गृहस्थ अवस्था की...
प्रतापगढ़ जिले के आदर्श धर्मनगरी पारसोला में वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी संघ सानिध्य में दोनों भव्य जैनेश्वरी दीक्षार्थी बहनों की...








