Tag - Vardhamanpur Research Institute

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डाक टिकटों की राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में पदक विजेताओं का सम्मान : वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी एवं चहेती पाटोदी सम्मानित 

हाल ही में इंदौर महानगर में क्षेत्र की प्रसिद्ध डाक टिकट एवं सिक्का संग्रहकर्ताओं की संस्था इंदौर फिलेटेलिक सोसाइटी एवं इंदौर न्यूमिस्मेटिक सोसाइटी ने संयुक्त...

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विश्व शांति के लिए श्री शांतिनाथ मंडल विधान और सर्व मंगल के लिए बड़े बाबा का विधान किया : माताजी ने सुमधुर वाणी से विधान पूजा करवाई, महत्व समझाया

आर्यिका सिद्ध श्री माताजी के ससंघ सानिध्य में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर समर्थ सिटी में दो महत्वपूर्ण मंडल विधान किए गए। इसके माध्यम से भक्ति भाव पूर्वक...

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यात्रा कैसी भी हो यदि आधी पार हो जाए तो फिर वापस लौट पाना संभव नहीं: इष्टोपदेश के रचयिता जैनाचार्य पूज्यपाद स्वामी विलक्षण प्रतिभा के थे धनी 

नरक गति और तिर्यंच गति के भयंकर दुःखों को सहन करके हमने मनुष्य गति तक का आधे से ज्यादा रास्ता पार कर लिया है। अब इस जगह से पुनः नीचे की गतियां नहीं प्राप्त...

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14 जून से वर्द्धमानपुर अमृत महोत्सव की होगी शुरूआत: प्रदर्शनी, व्याख्यानमाला और ऐतिहासिक प्रकाशन होंगे

वर्द्धमानपुर प्रकटोत्सव और सौभाग्य दिवस की गौरवगाथा आज भी लोग याद करते हैं। 75 वर्ष पहले यहां की धरती ने इतिहास के रत्न प्रकट किए थे और इसका सिरवी बा का खेत...

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भारत तिब्बत सीमा पर लहराता तिरंगा पर्यटकों के आकर्षण केंद्र: राजा नाभिराज और मरूदेवी की साधना स्थली है माणागांव

भारत तिब्बत सीमा से लगा माणागांव को भारत का प्रथम गांव होने का गौरव प्राप्त है। यह गांव भारत के उत्तराखंड राज्य के चमोली ज़िले में स्थित है। यह तिब्बत की सीमा...

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भगवान श्री आदिनाथ एवं श्रीराम की जन्म स्थली अयोध्या थाईलैंड में : भीरू शाश्वत तीर्थ के रूप में पूजित है ये नगरी

उत्तरप्रदेश में अयोध्या नगरी स्थित है। जिसको शाश्वत तीर्थ का श्रेय प्राप्त है। इस बात से बहुत कम लोग परिचित हैं कि एक अयोध्या थाईलैंड में भी है। यह नगरी...

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तमिलनाडु का भू-भाग: आदिनाथ व जैन तीर्थंकरों की अतिप्राचीन प्रतिमाओं से समृद्ध

तमिलनाडु में जैन धर्म की तीर्थंकर प्रतिमाएं एवं मंदिर मौजूद है। यहां के गौरवशाली इतिहास को काफी नुकसान हुआ है। परन्तु अभी भी जो अवशेष बच गये है वे इतनी संख्या...

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भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का 2872वां ज्ञान कल्याणक दिवस 18 मार्च को : हरिवंश पुराण में है वर्द्धमानपुर के पार्श्व चैत्य का उल्लेख

जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का जन्म 877 वर्ष ईसा पूर्व बनारस में हुआ था।उन्होंने 30 वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण की। चैत्र मास की...

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