पापों का पिता कोई है तो वह लोभ है । लोभ बड़ा खतरनाक होता है। लोभ अनर्थकारी होता है। लोभ सर्व- अनर्थो का मूल कारण है। लोभ ही पाप, हिंसा, मान, मायाचारी, चोरी...
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शौच का अर्थ शुचिभूत होना अर्थात् काल से आत्मा सप्तधातु मय शरीर के संसर्ग से अपवित्र कहलाता है। इस अपवित्र शरीर से भिन्न जो शुद्धात्मा का ध्यान करके उसी में रत...








