Tag - Uttama Shouch Dharma  श्रीफल जैन न्यूज

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धर्म सभा में दिए उत्तम शौच धर्म पर प्रवचन : लोभ छोड़ो, शौचधर्म स्वीकारो – आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी 

पापों का पिता कोई है तो वह लोभ है । लोभ बड़ा खतरनाक होता है। लोभ अनर्थकारी होता है। लोभ सर्व- अनर्थो का मूल कारण है। लोभ ही पाप, हिंसा, मान, मायाचारी, चोरी...

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उत्तम शौच धर्म पर विशेष आलेख: आत्मा का स्वरूप ही शौच धर्म है

शौच का अर्थ शुचिभूत होना अर्थात् काल से आत्मा सप्तधातु मय शरीर के संसर्ग से अपवित्र कहलाता है। इस अपवित्र शरीर से भिन्न जो शुद्धात्मा का ध्यान करके उसी में रत...

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