यदि पुण्य को पाप में लगाओगे तो यह पुण्य क्षीण होता चला जाएगा और जो दिख रहा है, वह भी सब हाथ से निकल जाएगा। जिस निगोद नरक से यह यात्रा प्रारंभ हुई थी फिर वहीं...
यदि पुण्य को पाप में लगाओगे तो यह पुण्य क्षीण होता चला जाएगा और जो दिख रहा है, वह भी सब हाथ से निकल जाएगा। जिस निगोद नरक से यह यात्रा प्रारंभ हुई थी फिर वहीं...
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