वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि गलत स्थान पर पहुंच कर भी अपने मन को संभाल कर रखना बहुत कठिन होता है।...
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गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि अपने शौक के लिये किसी को शोक में नहीं डालना चाहिए। हम अपने शौक के लिए जीव जन्तुओं की हिंसा करते हैं ।...
वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि अपने अंदर खोजना है कि कैसे हमारी आत्मा बुरे परिणामों को कर हमें दुखी...
वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि प्रत्येक जीव के अपनी-अपनी कषायों के कारण अनन्त प्रकार के परिणाम हो सकते...
यदि हम किसी से ईर्ष्या करते हैं, किसी का बुरा सोचते हैं तो हमें पाप का बंध अवश्य होगा। धर्म वर्जिता स्वयं धर्म नहीं करता, जो अपने अधीन है उसको भी धर्म नहीं...
वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा मन जाये तो जान दे, तू मत जाए शरीर। रसरी डरी कमान में, काह करेगा तीर। ज्ञान...
आर्यिका विभाश्री माताजी ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रवचन देते हुए कहा कि हमें यह ध्यान देना है कि हमें किन भावों से बचना है, जिससे क्रूरता हमारे अंदर...
गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान कहा कि अपराध बोध हुए बिना अपराध से मुक्ति पाना असम्भव है। उन्होंने...
गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान कहा कि समुद्र का जल तो शांत होता है, उसमें हवा के द्वारा लहरें...
गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रवचन के दौरान कहा कि इंद्रिय जनित विषय भोगों की आकांक्षा दुःख का कारण है और परिणामों की...








