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इंद्रध्वज महामंडल विधान का शुभारंभ, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में समझाया क्षमा और दश धर्म का महत्व : दशलक्षण महापर्व की शुरुआत, आचार्य श्री ने कहा – क्षमा आत्मा का स्वभाव है, पर्व देता है आत्मिक दीपावली का संदेश

  दशलक्षण महापर्व के प्रथम दिन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सानिध्य में इंद्रध्वज महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। विधानाचार्य पंडित कीर्तीय पारसोला...

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आचार्य वर्धमान सागर बोले-वैराग्य, व्रत संयम और रत्नत्रय से संवेग भावना जाग्रत होती है: 15 अगस्त का संदेश — जैसे देश आज़ाद हुआ, वैसे ही आत्मा को भी कर्म बंधन से मुक्त कराना है

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 16 कारण भावना अंतर्गत संवेग भावना की विस्तृत विवेचना करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में वैराग्य, व्रत संयम और रत्नत्रय से ही सच्चा...

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आत्मा का वास्तविक घर सिद्धालय सात राजू ऊपर स्थित है : विनयसंपन्नता भावना मोक्ष का द्वार है – आचार्य श्री की मंगल देशना

टोंक में सोलहकारण भावना पर्व के अंतर्गत आज दूसरी विनयसंपन्नता भावना का दिवस मनाया गया। आचार्य वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में विनय को मोक्ष का द्वार बताते हुए...

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