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दान का सार्थक स्वरूप और पनपती विकृतियां विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत किया शोधालेख : दान से दुर्गति का नाश होता है – डॉ. सुनील संचय

दान देकर के ही साधु और श्रावक दोनों ही कृतार्थ होते हैं। दान कोई सामाजिक व्यवस्था का वित्त प्रबंधन नहीं है अपितु यह वित्त प्रबंधन का एक उत्कृष्ट माध्यम है।...

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