बैंगलोर में जैन मंदिरों में दशलक्षण महापर्व को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। दस उपवास करने वाले श्रावक-श्राविकाओं का विशेष सम्मान किया गया और उनके तप एवं...
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दस लक्षण महापर्व के नवें दिन आचार्य वर्धमान सागर जी ने आकिंचन्य धर्म पर प्रवचन देते हुए बताया कि बहिरंग और अंतरंग परिग्रह से मुक्त होकर आत्मा का चिंतन करना ही...
धरियावद में पर्वराज पर्यूषण के आठवें दिन क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी महाराज ने धर्मसभा में त्याग धर्म की महिमा बताते हुए कहा कि त्याग से इंसान भगवान बन जाता...
सहारनपुर में दशलक्षण पर्व के अंतर्गत आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा कि संग्रहवृति दुःख का कारण है और त्याग धर्म ही जीवन को सुखी बनाता है। निस्वार्थ दान और...
ललितपुर में पर्युषण पर्व के दौरान आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि तप आत्मा को निर्मल बनाता है और इन्द्रियों पर विजय ही सबसे बड़ी साधना है।...
मुरैना के बड़े जैन मंदिर में दसलक्षण महापर्व के पांचवे दिन उत्तम सत्य धर्म का महत्व समझाया गया। मुनिश्री विलोकसागर ने सत्य बोलने और आत्मा की पवित्रता पर जोर...
दशलक्षण महापर्व के अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में सत्य धर्म की गहन विवेचना करते हुए कहा कि वचन ही सत्य है और आत्मा ही वास्तविक सत्य है।...
रामगंजमंडी में दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि कपट और छल का कोई भी कल्याण नहीं होता। सरल स्वभाव...
मुरैना में पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि माया और छल-कपट जीव को नरक और तिर्यंच गति में भटकाते हैं। शाम को पंडित...
दिगम्बर जैन मुनि परंपरा के पुनरुद्धारक प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पुण्य स्मृति में पद-शताब्दी महोत्सव आयोजित हुआ। उनके तप, त्याग और संयम से...








