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दूसरों की नजर से नहीं अपनी नजरों से देखे - मुनि श्री प्रतीकसागर मुनि श्री प्रतीकसागर कहा- मजाक मे भी गुणवानों का हास्य न करें

हम कर्मों के आस्रव और बन्ध मे तो लगे रहते है,परन्तु संवर और नीर्जरा पर ध्यान ही नहीं है! सामूहिक रूप से किया गया पाप का फल भी हमे सामूहिक रूप से भोगना पड़ता...

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