Tag - Shravakachar

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आचार्यश्री के वचन-साधु समाधि साधना से मरण को सुमरण बनाते हैं: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने भक्ति और साधना का महात्म्य बताया 

वीतरागी, सर्वज्ञ और हितोपदेशी भगवान द्वारा प्रतिपादित जिन धर्म केवलज्ञान रूपी लक्ष्मीयुक्त है। जो धर्मधारण पालन करने से मिलती है। धर्म का संग्रह और धन के...

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शिविर में बताया कार नहीं संस्कार जरूरी : जीवनोपयोगी शिक्षा को प्रदान की जा रही

ग्रीष्मकालीन शिक्षण शिविर का आयोजन देश भर में श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में हो रहा है।बागड क्षेत्र के धर्म नगरी नौगामा में भी श्रमण संस्कृति शिक्षण...

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