सारी दुनिया को जब हम व्यापक दृष्टि से देखते हैं, तो यह दो रूपों में दिखाई देती है—एक प्रकृति के रूप में और दूसरा संस्कृति के रूप में। जब हम प्रकृति की ओर देखते...
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पूज्य निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने चक्रवर्ती विवाह के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण और विचारणीय वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि चक्रवर्ती विवाह का...
सारी दुनिया मेरे काम आवे, ये अपनी जिंदगी का सबसे पतन का सूत्र है और यही अपना डाउनफॉल करता है, इसी से सब कुछ शुभ होते हुए अशुभ हो जाता है। हर वस्तु पर हम अपना...
मुनि श्री सुधासागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि प्रथम बार में ही गणधर परमेष्ठी सम्पूर्ण श्रुत का ज्ञान कर लेते है, लाखों करोड़ों वर्षों तक भगवान जब बोलते हैं तो...
श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर (जयपुर) के तत्वावधान में और निर्यापक मुनि सुधासागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में भाग्योदय तीर्थ सागर में 26 अक्टूबर से 28...
दुनिया में हमें किसी को पर मानने का अधिकार नहीं है, मैं स्व तो हूं लेकिन दुनिया पर नहीं हैं। दुनिया को दुनिया की दृष्टि से देखो तो स्व की अनुभूति होती है...
दुनिया में हमें किसी को पर मानने का अधिकार नहीं है, मैं स्व तो हूं लेकिन दुनिया पर नहीं हैं। दुनिया को दुनिया की दृष्टि से देखो तो स्व की अनुभूति होती है...
धर्मसभा में दिए प्रवचन : मां-बाप की एक आवाज सुनने के लिए जिंदगी लगा दो- मुनि श्री सुधासागर जी महाराज
सारे कर्ज चुकाये जा सकते हैं लेकिन जिसने अपने जीवन में उपकार किया है, उसका कर्ज तो छोड़ो, हम ब्याज भी नहीं चुका सकते। यहां तक आया कि एक अक्षर का भी, एक क्षण...
हम सब कुछ पाकर धन्य हो जाते हैं यह पूर्ण महानता नहीं है, हमें पाकर के दुनिया धन्य हो जाए यह पूर्ण महानता है। तीन प्रकार की दृष्टि होती है ज्ञेय दृष्टि, उपकारी...
हमारा ज्ञान ऐसा हो जो सम्पूर्ण जगत को ज्ञानी बना दे; हमारी दृष्टि ऐसी हो जो सभी को पवित्र कर दे; हमारा विचार ऐसा हो जो जगत को सभी दोषों से मुक्त कर दे। हमें...








