Tag - Religion

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विज्ञान का जितना भी अनुसरण है उसमें जैन धर्म का अनुसरण: आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी ने समर्पण के लिए बताए कई रहस्य 

रामगंजमंडी नगर में चातुर्मास के दौरान आचार्यश्री विनिश्चय सागर जी की धर्मसभा में धर्म, समाज, विज्ञान के अलावा संयम, समर्पण आदि के बारे में दिव्य ज्ञान बंट रहा...

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मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने कर्म कर कमाने के मार्ग बताए: मुनिश्री के प्रवचनों में श्रद्धालुओं को मिल रही धर्म की प्रेरणा

मुनिश्री सुधासागर जी के प्रवचन रोज चल रहे हैं और वे धर्मसभा में जैन समाज को कर्म, धर्म और संयम की परिभाषा से अवगत करवा रहे हैं। धर्म सभा में दी गई देशना से...

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श्री शांति सागरजी ने धर्म, जिनालय, जिनवाणी, संस्कृति की रक्षा हेतु महान कार्य कियाः जैन धर्म अनादि निधन धर्म है 

आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज का 33 साधु सहित धर्म नगरी प्रतापगढ़ में एक अप्रैल को भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जूना मंदिर में आयोजित धर्मसभा में आचार्यश्री ने...

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ज्ञान के सागर: आचार्य विद्यासागर का अनंत दर्शन

एक वर्ष पूर्व माघ शुक्ल नवमी को जब संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने सल्लेखनापूर्वक समाधि ली, तब भारत ने अपने एक ऐसे महान संत को खोया...

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तीर्थंकर कुल का जैन समाज अपने धर्म और संस्कृति को भूल रहा है: आचार्य श्री वर्धमान सागर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने की आचार्य श्री अजित सागर जी की प्रतिमा संघ सहित विराजित

आचार्य शिरोमणि श्री वर्धमान सागर जी ने उदयपुर में श्री महावीर स्वामी के महामस्तकाभिषेक कार्यक्रम, पंच कल्याणक के बाद साबला में मंंगल प्रवेश किया। उन्होंन यहां...

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मुरैना संस्कृत विद्यालय में ग्रीष्मकालीन शिविर :  श्रमण संस्कार शिक्षण शिविरों का आयोजन 21 मई से

श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर द्वारा आयोजित संस्कृति गौरव रजत महोत्सव के अंतर्गत 21 मई से 28 मई 2023 तक ग्वालियर एवं चम्बल सम्भाग के...

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साइंस ऑफ लिविंग सत्र में प्रवचन : आदत होना सही, गलत आदत होना दुर्गति का कारण – मुनि श्री निरंजन सागर जी

साइंस ऑफ लिविंग सत्र में मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज जीवन जीने का सबका अपना-अपना तरीका है। व्यक्ति का स्वयं के मापदंडों से जीना ठीक है लेकिन मापदंड के बारे...

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धर्म प्रभावना : आदर्श जीवन से ही बनता है गौरवशाली इतिहास : मुनि श्री निरंजन सागर 

मुनि श्री निरंजन सागर ने प्रवचन के दौरान कहा कि प्रसिद्धि भी दो तरह से होती है। पहली विख्यात और दूसरी कुख्यात ।यह ख्याति की चाह, पूजन( आदर सत्कार) की चाह, लाभ...

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