Tag - Rajesh Pancholiya

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आचार्य वर्धमान सागर जी के सान्निध्य में सहस्त्र महा मंडल विधान का शुभारंभ : भगवान के 1008 गुणों का हुआ गुणानुवाद और पूजन, श्रावकों ने भावपूर्वक अर्पित किए अध्र्य

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मंगल सान्निध्य में सहस्त्रनाम विधान का आरंभ हुआ, जिसमें भगवान के 1008 दिव्य गुणों का गुणानुवाद एवं अध्र्य समर्पण श्रद्धा के साथ...

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भगवान की प्रतिमा दर्पण हैं, जिससे आत्मा की मलिनता दूर हो सकती है – आचार्य श्री वर्धमान सागर : आदर्श नगर पारसनाथ मंदिर में पंचकल्याणक पत्रिका का विमोचन, आचार्य संघ सानिध्य में

आदर्श नगर टोंक में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पारसनाथ जिनालय में धर्मसभा में उपदेश दिया। उन्होंने भगवान की प्रतिमा को दर्पण के समान बताते हुए आत्मा की...

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प्रथम पट्टाचार्य वीर सागर जी का 68वां अंतरविलय समाधि वर्ष पूजन सहित मनाया : जीवन में हेय और उपादेय के विवेक से जीवन निर्माण होता है – आचार्य वर्धमान सागर जी

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने टोंक नगर की धर्मसभा में हेय और उपादेय के समीचीन ज्ञान को जीवन निर्माण का आधार बताया। प्रथम पट्टाचार्य वीर सागर जी का 68वां समाधि...

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आचार्य वर्धमान सागर जी ने समझाया आकिंचन्य धर्म का महत्व : दस लक्षण पर्व के नवें दिन हुआ भव्य पंचामृत अभिषेक

दस लक्षण महापर्व के नवें दिन आचार्य वर्धमान सागर जी ने आकिंचन्य धर्म पर प्रवचन देते हुए बताया कि बहिरंग और अंतरंग परिग्रह से मुक्त होकर आत्मा का चिंतन करना ही...

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इंद्रध्वज महामंडल विधान का शुभारंभ, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में समझाया क्षमा और दश धर्म का महत्व : दशलक्षण महापर्व की शुरुआत, आचार्य श्री ने कहा – क्षमा आत्मा का स्वभाव है, पर्व देता है आत्मिक दीपावली का संदेश

  दशलक्षण महापर्व के प्रथम दिन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सानिध्य में इंद्रध्वज महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। विधानाचार्य पंडित कीर्तीय पारसोला...

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आचार्य वर्धमान सागर बोले-वैराग्य, व्रत संयम और रत्नत्रय से संवेग भावना जाग्रत होती है: 15 अगस्त का संदेश — जैसे देश आज़ाद हुआ, वैसे ही आत्मा को भी कर्म बंधन से मुक्त कराना है

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 16 कारण भावना अंतर्गत संवेग भावना की विस्तृत विवेचना करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में वैराग्य, व्रत संयम और रत्नत्रय से ही सच्चा...

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आत्मा का वास्तविक घर सिद्धालय सात राजू ऊपर स्थित है : विनयसंपन्नता भावना मोक्ष का द्वार है – आचार्य श्री की मंगल देशना

टोंक में सोलहकारण भावना पर्व के अंतर्गत आज दूसरी विनयसंपन्नता भावना का दिवस मनाया गया। आचार्य वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में विनय को मोक्ष का द्वार बताते हुए...

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