Tag - Pravachan

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व्यक्ति को समझ में नहीं आता कि सही क्या है और गलत क्याः अपने को समझना कठिन नहीं है, दूसरे को समझाना ज्यादा कठिन है-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी

अच्छे लोगों का स्वभाव पेचीदा नहीं होता लेकिन गंदे लोगों का स्वभाव पेचीदा होता है। कभी-कभी गलत भी जरूरी है, संसार के संबंध में जब तार्किक दृष्टि से सोचते है तो...

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माता पिता बेटों से कॉम्प्रोमाईज़ कर लेते हैः हम जो चाहेंगे वह होगा, ये है स्वयंभू बनने का लक्षण-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज

भगवान ने जो देखा है वही होगा, समय से जो होना होगा वही होगा। दूर हो जाने से रिश्ते टूट जाते हैं ऐसा कोई नियम नहीं है और पास रहने से रिश्ते बने रहते हैं ये भी...

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आपका परिवार या गुरु निर्णय नहीं कर पा रहे है तो इंतजार करो, प्रकृति निर्णय करेगी- निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराजः वचन ही नहीं, मन भी सत्य होता है 

मेरे जीवन मे यह कार्य हो पायेगा या नहीं? जो निर्णय कर चुके है कि हो ही नही पायेगा, मैं पास हो ही नहीं सकता, उनके लिए तो कोई उपदेश होता नहीं क्योंकि वो तो...

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शरीर के प्रति ममत्व भाव नहीं रख,साधु शरीर के प्रति विरक्ति रखते हैं-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः श्रावक-श्राविकाओं के लिए संस्कार शिविर का आयोजन 

धर्मनगरी मुंगाणा में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी संघ सहित विराजित है। आचार्य संघ सानिध्य में प्रतिदिन प्रातःपंचामृत अभिषेक, शास्त्र प्रवचन, दोपहर को स्वाध्याय...

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किसी के निधन पर खुशी व्यक्त नहीं करनी चाहिए-मुनिश्री प्रशुत सागरः डडूका में जैन मुनियों का मंगल प्रवेश के बाद हुआ विहार

मुनि प्रणुत सागर, जयेन्द्र सागर, प्रिशम सागर व साध्य सागर खोडन और गढ़ी से विहार कर डडूका में समाजजनों की अगवानी में इनका मंगल प्रवेश हुआ। दिगंबर पाठशाला के...

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किसी के निधन पर खुशी व्यक्त नहीं करनी चाहिए-मुनिश्री प्रशुत सागरः डडूका में जैन मुनियों का मंगल प्रवेश के बाद हुआ विहार

मुनि प्रणुत सागर, जयेन्द्र सागर, प्रिशम सागर व साध्य सागर खोडन और गढ़ी से विहार कर डडूका में समाजजनों की अगवानी में इनका मंगल प्रवेश हुआ। दिगंबर पाठशाला के...

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दान देने का अर्थ है तुम्हें अमीर बनने की सिद्धि करानाः मुनिश्री सुधासागर जी के प्रवचनों से बढ़ रही धर्म प्रभावना 

निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों कटनी की ओर विहार कर रहे हैं। वे जहां भी विश्राम करते हैं वहां धर्मसभा को संबोधित अवश्य करते हैं। उनके...

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आचार्य श्री वर्धमान सागरजी की प्रेरणा से जैन धार्मिक पाठशाला पुनः प्रारंभः स्थापना 70 के दशक में कुन्थु सागरजी महाराज द्वारा की गई थी

प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी आचार्य पद शताब्दी महोत्सव अंतर्गत आचार्यश्री वर्धमान सागरजी की प्रेरणा से जैन धार्मिक पाठशाला पुन प्रारंभ की गई है। शताब्दी...

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जीवन में संस्कार होना जरूरी जहां संस्कार नहीं वहां धर्म नहींः मुनिश्री विनितसागर जी महाराज

धामनोद में जैन संत मुनिश्री विनीत सागरजी संसंघ का आगमन हुआ है। नित्य अभिषेक और शांतिधारा के बाद मुनिश्री विनीत सागरजी महाराज के प्रवचन हो रहे है। मुनिश्री ने...

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आर्यिकाश्री सुनयमति माताजी ससंघ का खंडवा की ओर मंगल विहारः सनावद में रोजाना हो रहे थे विविध धार्मिक कार्यक्रम

आर्यिका सुनयमति माताजी का मंगलवार को खंडवा की ओर विहार हुआ है। उनके साथ बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग चले। वे इंदौर से चातुर्मास कर सिद्धवरकूट की यात्रा से...

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