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नौगामा में दसलक्षण महापर्व पर अभूतपूर्व धर्म प्रभावना : श्रुतधाम बीना से आए ब्रह्मचारी संदीप जी के सान्निध्य में सैकड़ों लोगों ने लिया लाभ

बागड़ प्रांत की प्राचीन धार्मिक नगरी नौगामा (बांसवाड़ा) में दसलक्षण महापर्व पर श्रुतधाम बीना से आए बाल ब्रह्मचारी संदीप जी सरल भैया और राकेश जैन के सान्निध्य...

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सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में दशलक्षण महापर्व धूमधाम से मनाया: श्रद्धालु भक्त पूज्य बड़े बाबा मंदिर में अभिषेक, पूजन और विधान का ले रहे लाभ

सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से दशलक्षण महापर्व धार्मिक उत्साह और विविध...

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सौ गुण एक दुर्गुण ढांक देगा : निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी के प्रवचन से मिल रही श्रद्धालुओं को आत्मिक ऊर्जा

मुनि श्री सुधासागर जी के प्रवचन में सामंजस्य, समानता, सुधारवाद आदि के बारे में श्रद्धालुओं ज्ञान मिला। सोमवार को मुनि श्री ने गोसलपुर में इन्हीं बातों का जिक्र...

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नमोस्तु पर भरोसा करना हमारी सबसे बड़ी सिद्धि : मुनिश्री सुधासागर जी की धर्मसभ में ज्ञान और कर्म की सीख

मुनि सुधासागर जी महाराज बहोरीबंद अतिशय क्षेत्र में धर्मसभा को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कर्म, ज्ञान और धर्म की राह पर चलने का संदेश दिया। बहोरीबंद से पढ़िए...

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करने का मन होता है तो अधर्म हैः मोबाइल के अंदर लगे चित्र से तुम्हारे अंदर के चरित्र पता चल रहा है-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज

जैन दर्शन ने सूत्र दिया-तुम कौन हो? हर व्यक्ति ये जानने का प्रयास कर रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए, क्या जानना चाहिए? मुझे क्या बोलना, पढ़ना चाहिए? मैं क्या...

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व्यक्ति अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर पाताः जो तुम्हारे पास नहीं है उसको कभी याद नहीं रखना और जो है उसको कभी भूलना मत-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी 

सारे भक्तों से कहना है-माँ बाप का कहना मानना या नही मानना। लेकिन माँ बाप से झूठ मत बोलना। वो पाप मत करना जिसको छुपाने के लिए माँ-बाप से, गुरु से झूठ बोलना पड़े...

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मेरे पास है उससे ज्यादा दुनिया के पास नहीं हैः उसका साथ दो, जिसका कोई साथ नही देता-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी 

धर्मसभा में प्रवचनों के दौरान जैन धर्म अनुयायी बड़ी संख्या में पुण्यार्जन कर रहे हैं। जो मेरे में है उससे ज्यादा दुनिया में नहीं है और जो मेरे में नहीं है बाकी...

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दृष्टि बदल दो, सृष्टि बदल जायेगी-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजीः व्यक्ति को लगे कि इसका सुख मेरे अधीन, वही से शोषण चालू

धर्मसभा में प्रवचनों के दौरान जैन धर्म अनुयायी बड़ी संख्या में पुण्यार्जन कर रहे हैं। धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि प्रकृति को एक माँ की...

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गार्जियन के थप्पड़ को भी जो आशीर्वाद मान लेता है, उसे आशीर्वाद सदा सदा फलते रहते है : निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज: बड़े लोग गाली भी दे तो उसे मंत्र मानकर स्वीकार करना

दुनिया का जो सिस्टम है उसे हमें समझना होगा क्योंकि सृष्टि मूक होती है और मूक व्यक्ति के भाव को समझना बहुत कठिन होता है। बेटी की इच्छा है तो माँ-बाप को समझ में...

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एक नियम ले लो किसी अच्छे व्यक्ति की बुराई मत सुनना-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजीः साधु की आलोचना इतनी न हो कंही साधु बेकाबू हो 

न जाने कितने लोगों के पास ज्ञान होता है लेकिन अनुभव नहीं होने से वह कोई कार्यकारी नहीं और अनुभव आता है क्रिया में। रावण के पास ज्ञान था लेकिन अनुभव, चारित्र...

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