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भगवान के जन्म तप कल्याणक पर दीक्षित हुईं मनोरमा जैन: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पदमपुरा में दी दीक्षा

दीक्षा का अर्थ है, इच्छाओं का दमन दीक्षा याने लंच और मंच का बदल जाना। दीक्षा मतलब ड्रेस और एड्रेस का परिवर्तन हो जाना। विचारों में क्रांति को दीक्षा कहते हैं...

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