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गुरु के सानिध्य, विनयपूर्वक अर्जित ज्ञान से शिष्य का जीवन का निर्माण होता हैं-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः शिव सागरजी का वात्सल्य कभी भूल नहीं सकते 

आचार्यश्री वर्धमान सागरजी मुनिश्री पुण्य सागर एवं साधुओं सहित धरियावद विराजित हैं। आपके संघ सानिध्य में आचार्यश्री शिव सागरजी का 57वां अंतरविलय समाधि वर्ष...

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संयम दीक्षा धारण करने से सच्चा सुख मिलता है-मुनि हितेंद्र सागरजीः आचार्य वर्धमान सागरजी धर्म प्रभावना कर रहे हैं।

साधुओं की जन्म एवं कर्म भूमि धर्मनगरी मुंगाणा में आचार्य वर्धमान सागरजी ससंघ विराजित है। श्रावक-श्राविकाओं के संस्कार शिविर का आयोजन चल रहा है। जिसमें हितेंद्र...

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स्त्रियों में हमेशा प्रमाद विद्यमान रहता है-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः श्री महायशमति ने श्रावक का अर्थ प्रतिपादित किया

प्रमादमय स्त्रियों को प्रमादमय मूर्तियों की उपमा दी गई है, अर्थात स्त्रियों में हमेशा प्रमाद विद्यमान रहता है, जिस प्रकार मिट्टी की मूर्ति में मिट्टी की बहुलता...

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