पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी ने धर्मसभा में कहा कि- आत्मा में लीनता, निज में निज की लीनता ही ब्रह्मचर्य व्रत है। आत्म ब्रह्म में लीनता ही सर्व-श्रेष्ठ है।...
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मुनिश्री प्रणुत सागर जी महाराज सानिध्य में रविवार दोपहर 1 बजे धर्म प्रभावक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें निःस्वार्थ धर्म की प्रभावना करने वाले 125...








