जैन धर्म शास्त्रों में वर्णित तथ्यों के अनुसार प्रथम तीर्थंकर से लेकर 24वें तीर्थंकर तक अपने अवतरण के दौरान कोई न कोई विशेष चिन्हों को लेकर आए हैं। इन चिन्हों...
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निर्णायक मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि जैन दर्शन का पहला सूत्र है – “होश में आओ, साक्षीभूत बनो।” प्रकृति नियत है, लेकिन उपयोगिता...








