Tag - Munishri Viloksagar Ji Maharaj

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अपने-अपने कर्मों का फल सबको मिलता है कुछ इस भव में तो कुछ परभव में: मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज ने कर्म गति की महत्ता पर दिया जोर

मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक प्राणी को अपने कर्मों के परिणामों से डरना चाहिए। भले ही वह ईश्वर...

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भगवान श्रेयांसनाथ मोक्ष कल्याणक एवं रक्षाबंधन विधान 9 अगस्त को: रक्षा बंधन विधान में 700 अर्घ्य होंगे समर्पित 

तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव एवं रक्षाबंधन पर्व 9 अगस्त को धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। नगर के बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागर...

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तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी 3 अगस्त को होगी: प्रतियोगिता में 8 से 90 वर्ष तक के धर्मानुरागी हो सकेंगे शामिल 

जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ एवं 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 3 अगस्त को आयोजित होने जा रही है। प्रतियोगिता मुनिश्री विलोकसागर जी...

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आदिनाथ पार्श्वनाथ प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 3 अगस्त को: मुनिराज का धर्म प्रभावना के लिए अनोखा प्रयोग

जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ एवं 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 3 अगस्त को आयोजित होगी। मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज ने इस...

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प्राणी के कल्याण की भावना रखने वाला ही कहलाता है संत: मुनिश्री विलोक सागरजी ने धर्मसभा में बताए आत्म कल्याण के रहस्य

साधु, संत, महात्मा किसी धर्म विशेष के नहीं होते। सच्चे अर्थों में साधु संत वही है जो जन कल्याण की भावना रखते हैं। साधु कोई भी हो वह स्वयं कल्याण की भावना रखता...

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