Tag - Munishree Sudhasagarji

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व्यक्ति को समझ में नहीं आता कि सही क्या है और गलत क्याः अपने को समझना कठिन नहीं है, दूसरे को समझाना ज्यादा कठिन है-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी

अच्छे लोगों का स्वभाव पेचीदा नहीं होता लेकिन गंदे लोगों का स्वभाव पेचीदा होता है। कभी-कभी गलत भी जरूरी है, संसार के संबंध में जब तार्किक दृष्टि से सोचते है तो...

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माता पिता बेटों से कॉम्प्रोमाईज़ कर लेते हैः हम जो चाहेंगे वह होगा, ये है स्वयंभू बनने का लक्षण-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज

भगवान ने जो देखा है वही होगा, समय से जो होना होगा वही होगा। दूर हो जाने से रिश्ते टूट जाते हैं ऐसा कोई नियम नहीं है और पास रहने से रिश्ते बने रहते हैं ये भी...

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आपका परिवार या गुरु निर्णय नहीं कर पा रहे है तो इंतजार करो, प्रकृति निर्णय करेगी- निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराजः वचन ही नहीं, मन भी सत्य होता है 

मेरे जीवन मे यह कार्य हो पायेगा या नहीं? जो निर्णय कर चुके है कि हो ही नही पायेगा, मैं पास हो ही नहीं सकता, उनके लिए तो कोई उपदेश होता नहीं क्योंकि वो तो...

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जिसको धोख दी जाती है उसे कभी धोखा मत देना,यह बर्बादी का कारण बनता है-मुनिपुंगव श्री सुधासागरजीः अज्ञानी बनकर स्वाध्याय करो 

हमारी अच्छी जिंदगी में जो कुछ भी बुरा है जो कुछ भी बुराइयां है, बुरा क्षेत्र है, बुरा काल है, बुरी संगति ये सब मेरे सीमित ही नहीं, नष्ट हो जाये, ये भावनाएं जो...

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जब खुद ही अच्छा नहीं अच्छे की कल्पना करना व्यर्थ-श्री सुधासागरजी महाराजः अपने से अधिक सज्जन, धर्मात्मा को पीठ दिखाई नही जाती 

इस संसार में यदि कहीं सुख की झलक होती तो कोई संसार को नहीं छोड़ता। जब संसार में सुख नहीं है तो छोड़ना तो पड़ेगा। संसार का कोई क्षेत्र, कोई काल अच्छा नहीं है...

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