जहां क्षमा ,मार्दव, आर्जव, शौच आत्मा का स्वभाव है, वही सत्य, संयम, तप, त्याग इन गुणों को प्रकट करने के उपाय हैं। आप दान देते हैं, धर्म के लिए, लेकिन साथ खड़े...
Tag - Muni Shri vinmra Sagar Maharaj श्रीफल जैन न्यूज
शौच मतलब सुचिता या निर्मलता। जब क्रोध कम होता है तो भीतर कोमलता आ जाती है और हम बाहर और भीतर से सरल होने का प्रयास करने लगते हैं। लोभ तुलना पैदा करता है, डर...
भावनात्मक धोखेबाजी नहीं करने का नाम आर्जव (सरलता) धर्म है। मन वचन और काया के सरल होने का नाम आर्जव धर्म है। बच्चे बहुत सहज होते हैं, उनके पास आर्जव धर्म रहता...
मार्दव का मतलब है अहंकार / घमंड को त्यागना और विनम्रता और कोमलता को अपनाना। उत्तम मार्दव धर्म लोक व्यवहार को सुधारने के काम आता है, ये भावनाओं को भी नियंत्रित...
छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि क्रिसमस पर तो छुट्टी मिलती है किंतु पयुर्षण पर्व पर नहीं मिलती, यहां तक कि इन...
दुनिया का हर व्यक्ति अदृश्य स्रोत को मानता है, वैज्ञानिक भी इसमें विश्वास करते हैं। लोग इसीलिए साधना करते हैं। इन शक्तियों के माध्यम से हम विकास और विनाश दोनों...
मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने कहा कि सत्ता, संपत्ति और सामर्थ्य को प्राप्त करके कुछ लोग अपने आप को भगवान समझने लगते हैं। इन तीन चीजों में ज्यादा समय तक...
मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि आज नाम की बड़ी पूछ है। मान मर्दन करने के बाद ही साधु बनाए जाते हैं। व्यक्ति अपना चेहरा तो देखना चाहता है...
मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने कहा कि मैंने आज एक लेख पड़ा, उसमें लिखा था कि साधु के दो काम होते हैं, एक है तप करना और दूसरा है श्रुत का अध्ययन करना। यहां...
मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि साधु मार्ग में पांच प्रकार के आनंद होते हैं। हमने तो संयमी बनने के बाद ये सुने थे, किंतु आप आज ही ये सुन...








