आरोप परख, आलोचात्मक, अपमान जनक आदेशात्मक इन चार सूत्रों का ध्यान रखते हुए यदि आप अपने वचनों का ध्यान रखेंगे तो आप विनम्रता की प्रतिमूर्ति कहलायेंगे। यह उदगार...
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अकेले यौन संयम को साध लेना ही ब्रह्मचर्य नहीं,अपनी आत्मा के निकट आकर अपनी साधना को पूर्ण करने का नाम ब्रह्मचर्य है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने...
जिस धन को जिस संपत्ति को तुमने अपना मान रखा है। वह धन संपत्ति भी कब चली जाएगी पता नहीं। प्रकृति कब तुम्हारे साथ कौनसा खेल खेल दे पता नहीं। जब यह सब छूट जाने...
भोपाल (अवधपुरी) में दशलक्षण पर्व के तहत संस्कार शिविर चल रहा है। इसमें मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज मंगल देशना देकर धर्म की प्रभावना कर रहे हैं। शिविर में...
जैसा तुम बाहर से दिखना चाहते हो वैसा अंदर से भी बन जाओ। चलो सीधा और बनो सच्चा। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ने पर्युषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव...








