Tag - Muni Shri Niranjan Sagar

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कुण्डलपुर में हुआ संघ सहित मुनिओ का शुभागमन: दिव्य घोष की मंगल ध्वनि से पूरा क्षेत्र गुंज उठा

सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य मुनि श्री अक्षयसागर जी महाराज ,मुनि श्री...

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साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में हुए मुनि के प्रवचन : आपको जो बनना है, आप उनके पास जाएं – मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज

साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में मुनि श्री निरंजन सागर महाराज ने कहा कि इस सत्र में हम आपके भविष्य को लेकर चर्चा करने जा रहे हैं। आपको जो बनना है आप उनके पास जाएं...

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साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में हुए मुनि के प्रवचन : प्रतिमा का प्रतिकार भारतीय सनातन संस्कृति पर कुठाराघात है – मुनि श्री निरंजन सागर

साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में मुनि श्री निरंजन सागर महाराज ने कहा कि इस सत्र में हम प्रतिमा अर्थात् मूर्ति के महत्त्व को समझने का प्रयास करेंगे। आचार्यों ने...

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साइंस ऑफ लिविंग में प्रवचन : अर्थ ,काम और धर्म यह तीनों पुरुषार्थ ही त्रिवर्ग कहलाते हैं – मुनि श्री निरंजन सागर 

जिसने जीवन की वास्तविकता को समझ लिया है, उसने जीवन की सात्विकता को पा लिया है। यह बात मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज ने साइंस ऑफ लिविंग में कही। पढ़िये...

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सलाह और सहयोग दोनों ही महत्वपूर्ण : मुनि श्री निरंजन सागर जी, साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में सहयोगात्मक सलाह के बारे में बताया 

दुर्योधन शकुनि से सलाह लेता था और अर्जुन श्रीकृष्ण से। आपके सहयोगी कौन हैं यह भी बड़ा महत्वपूर्ण है क्योंकि राम के भाई लक्ष्मण ने सहयोग दिया तो राम को विजयश्री...

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गुरु का आकर्षण ही सही मायने में गुरुत्वाकर्षण : मुनि श्री निरंजन सागर जी: साइंस ऑफ लिविंग सत्र में गुरु की शक्ति के बारे में बताया 

गुरु की अवर्णनीय महिमा का वर्णन बस इतना ही है कि प्रतिपल उनका जाप, उनका नाम ,आपके मन पर ,वचनों पर, और शरीर के एक एक अवयव पर स्पंदित होता रहे ।गुरु यह एक ऐसा...

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साइंस ऑफ लिविंग सत्र में प्रवचन : आदत होना सही, गलत आदत होना दुर्गति का कारण – मुनि श्री निरंजन सागर जी

साइंस ऑफ लिविंग सत्र में मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज जीवन जीने का सबका अपना-अपना तरीका है। व्यक्ति का स्वयं के मापदंडों से जीना ठीक है लेकिन मापदंड के बारे...

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धर्म प्रभावना : आदर्श जीवन से ही बनता है गौरवशाली इतिहास : मुनि श्री निरंजन सागर 

मुनि श्री निरंजन सागर ने प्रवचन के दौरान कहा कि प्रसिद्धि भी दो तरह से होती है। पहली विख्यात और दूसरी कुख्यात ।यह ख्याति की चाह, पूजन( आदर सत्कार) की चाह, लाभ...

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