Tag - Muni Arpit Sagar

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भगवान जिनेंद्र की आज्ञा का पालन करने वाला होता है जैन: सम्यक दर्शन,सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की एकता ही है मोक्षमार्ग

वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के शिष्य मुनि अर्पित सागर ने कहा कि जो सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र से सहित होता है, वह...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : प्रभु से लगन लगा दो तो किसी संसारी चीज की आवश्यकता नहीं रहती- मुनि अपूर्व सागर

संकल्प करने से अपने आप में शक्ति आती है और कार्य सफल होते हैं। जीवन में मुख्यतया ये शक्तियां काम करती हैं और उत्साह लाती हैं- संकल्प, साहस और संगठन। उक्त विचार...

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धर्म सभा में दिए प्रवचन : प्रार्थना ही आत्मा की सच्ची खुराक होती है – मुनि अपूर्व सागर जी महाराज

भक्ति का मतलब होता है पूज्य पुरुषों और गुणवान पुरुषों के गुणों का स्मरण करना, याद करना, उनके गुणों का बखान तथा उनके जैसे गुणों को प्राप्त करने का प्रयत्न करना...

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धर्म सभा में दिए प्रवचन : अपने अंदर विराजमान आत्मा की सेवा करें

 दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य वर्धमानसागर के संघस्थ मुनि अर्पित सागर ने धर्म उपदेश देते हुए कहा कि यह शरीर क्या है, जो जीर्ण होता है और जो शरीर नाम कर्म के उदय...

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