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मन, वचन,काय कुटिलता का परित्याग सरलता धारण ही उत्तम आर्जव धर्म: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 76 वां अवतरण वर्ष भक्ति पूर्वक मनाया

दशलक्षण पर्व के तृतीय उत्तम आर्जव दिवस पर आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने अपनी देशना में कह कि भगवान की इंद्रध्वज मंडल विधान की पूजन सामान्य बात नहीं है। बहुत...

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मन और वचन में अंतर तिर्यंच गति का कारण है : मायाचारी से बचना जरूरी है – आचार्य विनिश्चय सागर महाराज

रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन देते हुए कहा कि मायाचारी तिर्यंच गति का कारण बनती है। मन में कुछ और वचन में कुछ कहना...

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