निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि कर्म की अदालत में कोई लेन-देन नहीं करना। हर्ष पूर्वक सजा को ग्रहण करना...
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दिगम्बराचार्य विशुद्धसागर गुरुदेव ने शनिवार को धर्मसभा में प्रवचन देते हुए हुए कहा कि कार्य करने का अधिकारी वही होता है जो लगनशील, धैर्यवान, शक्तिशाली तथा...
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना। पढ़िए शुभम जैन की...
दिगम्बराचार्य पूज्य श्री विशुद्धसागर जी गुरुदेव ने धर्म सभा में सम्बोधन करते हुए कहा कि अहिंसा-धर्म ही सर्व-श्रेष्ठ है, जीव रक्षा से बढ़कर अन्य कोई धर्म नहीं...
उदयनगर में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए...
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना। जानते हैं उनके...
जो आज तक किया है अब नहीं करेंगे और जो नहीं किया है वो अब करेंगे। ऐसी विचारधारा जब आपकी अंतस चेतना में आयेगी, तब आप कुछ सुखी हो सकते हैं। उक्त उद्बोधन आचार्य...
चातुर्मास के दौरान धर्मसभा में प्रवचन : मनुष्य पर्याय चिंतामणि रत्न के समान हैं -आचार्य विनिश्चयसागर
मनुष्य पर्याय से बढ़कर कोई सौभाग्य नहीं हैं, ये सबसे बड़ा सौभाग्य हैं जो आपको प्राप्त हुआ है। आप इसे महसूस करें तभी आप मानव पर्याय की महत्त्वता समझ सकेंगे।...
गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ससंघ ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान बीते 6 जुलाई को शिक्षण शिविर में अपनी वाणी से सभी...
जो गुणी जनों की निंदा करते हैं, वे विघ्न संतोषी हैं। इन कार्यों से सदैव बचें। यह मंगल प्रवचन आर्यिकारत्न विज्ञानमति माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहे।...








