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आचार्य शांतिसागर ने दिगंबर परंपरा को पुनर्जीवित करने में दिया ऐतिहासिक योगदान : श्रवणबेलगोला आने वाली पीढ़ियों को धार्मिकता, सहिष्णुता और शांति के मार्ग पर करता रहेगा प्रेरित

 उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भारतीय संस्कृति में जैन धर्म के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि जैन दर्शन के मूल सिद्धांत आज भी सामाजिक सौहार्द के...

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आईटी सिटी बैंगलोर में युवा और उनके परिवार धर्म की ओर अग्रसर : दस उपवास कर रहे श्रावक-श्राविकाओं का विशेष सम्मान

बैंगलोर में जैन मंदिरों में दशलक्षण महापर्व को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। दस उपवास करने वाले श्रावक-श्राविकाओं का विशेष सम्मान किया गया और उनके तप एवं...

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प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज पद-शताब्दी महोत्सव सम्पन्न : तप, त्याग और संयम की अद्वितीय गाथा का स्मरण

दिगम्बर जैन मुनि परंपरा के पुनरुद्धारक प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पुण्य स्मृति में पद-शताब्दी महोत्सव आयोजित हुआ। उनके तप, त्याग और संयम से...

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हेगड़े परिवार पर लगे आरोप झूठे : हेगड़े परिवार ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को वर्षों से बनाए रखा है- भट्टारक धवलकीर्ति जी स्वामी

श्रीक्षेत्र अरिहंतगिरी के भट्टारक धवलकीर्ति जी स्वामी ने कहा कि कि धर्मस्थल का प्रमुख मंदिर शिव मंदिर (मंजुनाथ स्वामी) है, जिसका संचालन और संरक्षण हेगड़े...

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राज्यपाल से समाज प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात: साधु-साध्वियों की सुरक्षा और अन्य मांगों पर चर्चा

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाउ बागड़े से राजभवन में भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा पश्चिम बंगाल प्रांत संयोजक साहिल जैन के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात की।...

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तीर्थंकर की अलग-अलग प्रतिमाओं के साथ चतुर्विंशंती तीर्थंकर प्रतिमाएं बनने की परम्परा रही हैः प्रमुख केंद्रीय तीर्थंकर कायोत्सर्ग मुद्रा में 

जैन धर्म के तीर्थंकरों की प्रतिमाओं के बारे में जानकारिया दी जा रही है। वर्द्धमानपुर शोध संस्थान से जुडे़ ओम पाटोदी हमें इस बारे में नई एवं खोजपूर्ण जानकारियॉ...

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दया और करुणा के सागर आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज: वर्तमान युग के ‘वर्धमान’ का आज है प्रथम समाधि दिवस

वर्तमान युग के वर्धमान के नाम से विश्व विख्यात संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी इसी श्रेणी में अपना गौरवपूर्ण स्थान रखते हैं। जैन धर्म के धर्मावलंबियों की...

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मुनि और श्रावक समाज के बीच कड़ी के रूप में एक प्रणाली है भट्टारक परंपरा : देव, शास्त्र, गुरु और संघ की रक्षा का भार लिए हुए भट्टारक 

भट्टारक परंपरा 5वीं 6वीं शताब्दी से चली आ रही है और यह एक प्रतिष्ठित परंपरा है; परंपरा धर्मिक अधिकार का एक विशेष रूप है जो प्रारंभिक दिगंबर जैनियों से विकसित...

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धार्मिक आयोजन में रही प्रमुख भट्टारकों की उपस्थिति : श्रवणबेलगोला में भट्टारक स्वामीजी के चरण प्रतिष्ठापन का आयोजन

श्री दिगंबर जैन महासंस्थान मठ श्रवणबेलगोला के पूर्व भट्टारक जगतगुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के चरण का प्रतिष्ठापन गुरुवार, 5 दिसंबर...

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6 दिसंबर को होगा निषिधि मंडप का लोकार्पण समारोह : विधायक सीएन बालकृष्ण ने अभिनव चारुकीर्ति महास्वामी के साथ किया समारोह स्थल का दौरा

  दिगंबर जैन महासंस्थान मठ श्रवणबेलगोला के जगत्गुरू स्वस्तिश्री अभिनव चारुकीर्ती भट्टारक स्वामी जी ने मंगलवार को श्रीक्षेत्र के श्री कांजी भवन में...

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