Tag - Jinendra Bhagwan

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भगवान ने द्रव्य, भाव और नौ कर्म रूप जन्म-जरा-मरण रूपी नगर को नष्ट किया — आचार्य वर्धमान सागर जी : सहस्त्रनाम विधान की पूजा में भगवान के गुणों का वर्णन

सहस्त्रनाम मंडल विधान के दौरान आचार्य वर्धमान सागर जी ने बताया कि भगवान ने द्रव्य, भाव और नौ कर्म रूप तीन पुर — जन्म, जरा और मरण रूपी नगर को नष्ट किया है। पूजन...

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स्वप्न में भी यदि आत्महत्या का भाव आए तो प्रायश्चित लेना आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने मरण के प्रकारों का कराया ज्ञान 

आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज ने मरण के प्रकार के विषय में प्रकाश डाला। इच्छा मरण और अनिच्छा मरण के विषय में प्रकाश डालते हुए कहा कि इच्छा में लोग...

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सत्य की पहचान के लिए जिनेंद्र भगवान का आलंबन जरूरी: आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने सत्य को सर्वव्यापक बताया

आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए सत्य के विषय में प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमें सत्य को जानना चाहिए। असत्य में केवल भ्रांति ही...

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आचार्य योगिन्द्र सागरजी महाराज का 13वां समाधि दिवसः अतिशय क्षेत्र योगिन्द्रगिरी में होंगे आयोजन

अतिशय क्षेत्र योगिन्द्रगिरी मे आचार्य योगिन्द्र सागरजी का तेरहवा समाधि दिवस सकल दिगम्बर जैन समाज सागवाड़ा के संयोजन में मनाया जाएगा। समाज के प्रतिष्ठाचार्य...

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मंगलकारी द्रव्यों से पंचामृत अभिषेक करने से पुण्य की प्राप्ति होती हैं-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः मंत्रोच्चार शुद्ध करना चाहिए

मुंगाणा में संघ सहित विराजित आचार्यश्री वर्धमान सागरजी के सानिध्य में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। चमत्कारी श्री आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर भव्य...

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अंतरंग आत्मा पर लगे कर्मों को संयम तप साधना के माध्यम से हटाया जाता है-आचार्य श्री वर्धमान सागरजीः राग-द्वेष के कारण कर्मों का बंध होता है 

मुंगाणा में संघ सहित विराजित आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने दोपहर को शास्त्र स्वाध्याय में अंतरंग और बहिरंग तप की विवेचना की। बगुले के माध्यम से बताया कि बगुला...

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श्री दिगंबर जैन खंडेलवाल महासभा का परिचय सम्मेलन सम्पन्न : 750 प्रत्याशियों की आई प्रविष्टियां

कोषाध्यक्ष प्रेमचंद काला ने बताया कि इस वर्ष भी प्रत्याशियों द्वारा यहां पर फॉर्म भरे गए और प्रत्याशी आयोजन में भी सम्मिलित हुए और इस सम्मेलन में उन्होंने अपना...

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