तीर्थों की वंदना करने से मन पवित्र और निर्मल हो जाता है। सौभाग्यशाली, पुण्यशाली मनुष्यों को ही तीर्थों की वंदना करने का अवसर मिलता है। यह उद्गार श्री शांतिनाथ...
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प्रतिभाएं किसी भी समाज की रीढ़ होती हैं और जब समाज अपनी भावी पीढ़ी को संस्कारों के साथ आगे बढ़ने का मंच देता है, तब इतिहास रचता है। ऐसा ही गौरवशाली दृश्य...
जैसवाल जैन उपरोचियां समाज, इंदौर में सामूहिक क्षमावाणी स्नेह मिलन समारोह विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न हुआ। समारोह में स्व. डॉ...








