धरियावद में श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में क्षुल्लक महोदय सागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यूषण पर्व आत्म क्रांति का पर्व है, जो मानव...
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1916 में रचित पं. जुगल किशोर मुख्तार “युगवीर” की कविता ‘मेरी भावना’ आज 109 वर्षों बाद भी उतनी ही प्रासंगिक है। यह रचना राष्ट्रीयता, विश्व बंधुता, सहिष्णुता और...
सनावद में मुनि श्री विश्व सूर्य सागर और साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में ज्याप अनुष्ठान का आयोजन हुआ, जिसमें समाजजनों ने आहुति अर्पित कर आत्मशुद्धि का मार्ग...








