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क्षमा धर्म से शत्रु भी बन जाते हैं मित्र – चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा : पर्यूषण पर्व आत्म क्रांति का पर्व है, विश्व बंधुत्व की भावना को करता है प्रबल – क्षुल्लक महोदय सागर जी


धरियावद में श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में क्षुल्लक महोदय सागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यूषण पर्व आत्म क्रांति का पर्व है, जो मानव जीवन में क्षमा, सत्य, संयम और त्याग जैसे मूल्यों को जागृत करता है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…


धरियावद। दिगंबर जैन समाज का प्रमुख पर्व पर्यूषण नगर के श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रारंभ हुआ। पहले दिन आयोजित धर्मसभा में क्षुल्लक महोदय सागर जी महाराज ने कहा कि पर्यूषण पर्व लौकिक नहीं बल्कि आत्म क्रांति का पर्व है। पर्व हमारे जीवन में बदलाव लाने का माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि आत्मा का स्वाभाविक श्रृंगार क्षमा, मृदुता, सत्य, संयम, तप, त्याग और निर्लोभता है। पर्यूषण पर्व इन्हीं गुणों को उद्घाटित करता है और आत्मा को परमात्मा बनाने का पुरुषार्थ सिखाता है।

क्षुल्लकजी ने बताया कि दस धर्मों से आत्म जागरण होता है और विश्व बंधुत्व की भावना जाग्रत होती है। उन्होंने कहा कि क्षमा केवल मनुष्यों के पास है, यह हृदय का धर्म है। क्षमा से शत्रु भी मित्र बन सकते हैं जबकि क्रोध हमारे अच्छे विचारों और कार्यों पर ताला लगा देता है।

उन्होंने समाज से आह्वान किया कि उत्तम क्षमा धर्म का पालन करके जीवन को सार्थक बनाया जाए और पर्यूषण पर्व का वास्तविक लाभ उठाया जाए।

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