Tag - Jain Spiritual Guidance

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धर्म और आत्मा का असली स्पर्श तब होता है, जब मनुष्य भीतर से बदलने को तैयार होता है : चोर चोरी से जाए, पर हेराफेरी से न जाए – आचार्य विनिश्चयसागर

रामगंजमंडी में आयोजित जैन धर्मसभा में आचार्य श्री विनिश्चयसागर जी ने मनुष्य के आचरण और मूल्यों को केंद्र में रखकर संयम और सच्चाई की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने...

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