Tag - jain pravachan

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अहंकार नहीं, विनम्रता ही बनाती है व्यक्ति को सच्चा नेता : विनम्रता में छिपी है नेतृत्व की सच्ची कला – मुनि प्रमाण सागर

भोपाल के अवधपुरी में चल रहे पर्युषण महापर्व पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने कहा कि विनम्रता ही सच्चे नेतृत्व की आत्मा है। अहंकारी व्यक्ति केवल हुकूमत करता है...

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आचार्य विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में भव्यता से मनाया जाएगा दसलक्षण पर्व: रामगंजमंडी में जिनालयों की विशेष सजावट, समाजबंधुओं में उत्साह का वातावरण

रामगंजमंडी में आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ससंघ सानिध्य में दसलक्षण पर्व का भव्य आयोजन 28 अगस्त से शुरू होगा। जिनालयों में विशेष सजावट, प्रभु अभिषेक...

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विदेश में जैनधर्म की प्रभावना करेंगे डॉ. जीवन प्रकाश जैन : अमेरिका में 15 दिवसीय प्रवास कर देंगे जैनधर्म का संदेश

अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवन प्रकाश जैन 15 दिवसीय अमेरिका प्रवास पर जैनधर्म की प्रभावना हेतु रवाना हुए। उन्हें जैन समाज...

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विनिश्चय सागर महाराज ने प्रवचन में दी मन की सफाई की सीख : बोले-काम बिगड़ता है जब मन बिगड़ता है 

रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने रविवार को मंगल प्रवचन में कहा कि जीवन की सारी समस्याएँ मन से जुड़ी हैं। जब मन बिगड़ता है तो काम भी...

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धर्मसभा में मुरैना जैन मंदिर पर मुनिश्री ने श्रावकों को संयम और श्रद्धा का संदेश दिया : साधक की साधना में सहयोगी बनना श्रावक का कर्तव्य है – मुनिश्री विलोकसागर

मुरैना के बड़े जैन मंदिर में चातुर्मासरत आचार्यश्री आर्जवसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि साधक की साधना...

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विद्यालयों में श्रमण प्रवचन व अर्ह ध्यान योग शिविर का आयोजन होगा : जैन समाज ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया

राजस्थान सरकार ने विद्यार्थियों के मानसिक तनाव दूर करने व सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए विद्यालयों में श्रमण साधु-साध्वियों के प्रवचन और अर्ह ध्यान योग...

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शिक्षक सम्मेलन में आचार्य श्री ने दिया स्वाध्याय और संस्कारों पर विशेष संदेश : चारित्र, संस्कार, संयम और आगम ज्ञान से ही होता है जीवन का निर्माण : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

टोक नगर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने शिक्षक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन का निर्माण चारित्र, संस्कार, संयम और आगम ज्ञान से ही संभव है। माता...

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आचार्य वर्धमान सागर बोले-वैराग्य, व्रत संयम और रत्नत्रय से संवेग भावना जाग्रत होती है: 15 अगस्त का संदेश — जैसे देश आज़ाद हुआ, वैसे ही आत्मा को भी कर्म बंधन से मुक्त कराना है

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 16 कारण भावना अंतर्गत संवेग भावना की विस्तृत विवेचना करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में वैराग्य, व्रत संयम और रत्नत्रय से ही सच्चा...

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आत्मा का वास्तविक घर सिद्धालय सात राजू ऊपर स्थित है : विनयसंपन्नता भावना मोक्ष का द्वार है – आचार्य श्री की मंगल देशना

टोंक में सोलहकारण भावना पर्व के अंतर्गत आज दूसरी विनयसंपन्नता भावना का दिवस मनाया गया। आचार्य वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में विनय को मोक्ष का द्वार बताते हुए...

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वर्तमान को सुधारो, भविष्य स्वयं सँवर जाएगा — मुनि प्रज्ञान सागर जी : दृष्टि बदलो, सृष्टि बदल जाएगी — नैनवा धर्मसभा में मुनि श्री का संदेश

नैनवा (बूंदी) में वर्षायोग कर रहे मुनि 108 प्रज्ञान सागर जी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि संसार को सुधारने से पहले स्वयं को सुधारना जरूरी है। दृष्टि बदलने से...

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