साइंस ऑफ लिविंग सत्र में मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज जीवन जीने का सबका अपना-अपना तरीका है। व्यक्ति का स्वयं के मापदंडों से जीना ठीक है लेकिन मापदंड के बारे...
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मुनि श्री निरंजन सागर ने प्रवचन के दौरान कहा कि प्रसिद्धि भी दो तरह से होती है। पहली विख्यात और दूसरी कुख्यात ।यह ख्याति की चाह, पूजन( आदर सत्कार) की चाह, लाभ...








