मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि जिस भी व्यक्ति ने संघर्षों को सहर्ष के साथ स्वीकार किया है, उस संघर्ष के काल में जिसने धैर्य को नहीं खोया...
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बकस्वाहा के पारसनाथ जैन मंदिर परिसर में आयोजित धर्मसभा में ‘ जीवन है पानी की बूंद ‘ महाकाव्य के मूल रचयिता, बुंदेलखण्ड गौरव, भावलिंगी संत...
ग्राम गिरार में श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में चौथे दिन प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशांत भैया व पं सनत कुमार, विनोद कुमार के द्वारा विधि-विधान...
मुनि श्री निरंजन सागर ने प्रवचन के दौरान कहा कि प्रसिद्धि भी दो तरह से होती है। पहली विख्यात और दूसरी कुख्यात ।यह ख्याति की चाह, पूजन( आदर सत्कार) की चाह, लाभ...
अशुद्ध कारण से कभी त्रिकाल में भी शुद्ध कार्य घटित नहीं हो सकता है। बिना कारण के भी कोई कार्य संपन्न नहीं होता और कारण के होते पर भी कार्य हो जाए, यह भी आवश्यक...
प्रतापगढ़। आप अपना मन स्थिर रखें। जैसे आप अपने समस्त सांसारिक कार्यों की योजना बनाते हैं, उसी तरह से जीव के कल्याण की योजना बनाएं। तभी आप मोक्ष मार्ग पर आगे...








