Tag - Digambar Jain

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : देव, शास्त्र और गुरु के सामने कभी गरीब मत बनना-मुनि सुधासागर महाराज

जैन सम्प्रदाय में कहा है भगवान, गुरु के सामने कभी लेने नहीं जाना। उनको देना है। खेत में बोएंगे, तभी फसल आएगी। बड़ों का धन भोगा नहीं जाता, उनको दिया जाता है।...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : जो लोग कान के कच्चे होते हैं वह लोग आगम के अच्छे शुत्र को छोड़ देते हैं- आचार्य श्री प्रमुख सागर

चार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने कहा कि संसार में सबके पास कान हैं। कान से सुनते सब हैं परन्तु कान की बात पर ध्यान नहीं देते हैं। जो लोग कान के कच्चे होते हैं...

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30 अगस्त को नोएडा में वस्त्र त्यागकर बनेंगे जैन संत : दीक्षार्थी आनंद भैया की हुई गोद भराई

श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आनंद भैया की गोद भराई की गई। वह दिगम्बराचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज के कर कमलों से 21 अगस्त को श्री...

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ज्ञानतीर्थ पर बताया कि अहंकार क्यों होता है : अपने को सर्वश्रेष्ठ मानने पर होता है अहंकार- आचार्य ज्ञेयसागर

अपने गुणों को ही संसार में सर्वश्रेष्ठ समझकर औरों को दीन, हीन, नीच, कमजोर समझना और देखना अहंकार की श्रेणी में आता है। उक्त विचार सप्तम पट्टाचार्य श्री...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : भक्तामर के 26वें काव्य पर दिया व्याख्यान

धर्मसभा में उपाध्याय श्री विहसंतसागर महाराज ने कहा कि जो भी जीव जन्म लेता है, उसके साथ कर्म साथ में जरूर आते हैं। ज्ञानवरण आदि आठ कर्म जीव को दुःख देते हैं और...

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भाजपा के टिकिट पर राजाखेड़ा से लड़ सकते हैं चुनाव : पुलिस की ड्यूटी के घंटे तय नहीं होते -पवन जैन

पुलिस के तीज त्योहार भी इसी में है कि लोगों की होली, दिवाली, ईद , वैशाखी और राखी शांति से मन जाये। उक्त विचार पुलिस महानिदेशक पवन जैन भोपाल ने पुलिस- प्रशासन...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : किसी के उपकार को मानना हमारे बड़प्पन का द्योतक है – आर्यिका विभाश्री 

 आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि जब कोई किसी के उपकार को मानता है तो वो जीवन में बहुत ऊचाइयों को प्राप्त कर लेता है, चाहे वह गुरुओं का उपकार...

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गणधर विलय महामंत्र के 13वें महामंत्र पर प्रवचन : हमेशा ऐसी भावना रखें कि मनपर्ययज्ञानी बनकर अरिहंत अवस्था को प्राप्त हों- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

श्री 1008 मुनिसुव्रत नाथ दिगम्बर जैन मंदिर, स्मृति नगर में अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा कि हमें मनपर्ययज्ञानी बनना है तो मन को निर्मल पवित्र व...

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कथावाचक ने क्षमा मांगी : क्षमा वीरस्य भूषणम जैनों का इतिहास

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य श्री ने सभी जैन संत समाज से अपने व्यक्तित्व की क्षमा याचना की और कहा कि क्षमा वीरस्य भूषणम यह जैनों का इतिहास रहा है। क्षमा करने में...

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झुमरीतिलैया से जैन समाज का एक जत्था जैन संत 108 विशुद्ध सागर जी महामुनिराज का दर्शन को बड़ौत रवाना: जाने से पहले हुई भव्य आरती व णमोकार चालीसा 

जैन संत कोडरमा में चातुर्मास कर रहे गुरुदेव मुनि श्री 108 सुयश सागर मुनिराज ने सभी जाने वाले यात्री संघ को मंगल आशीर्वाद देते हुए कहा कि तीर्थ यात्रा और...

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