Tag - Digambar Jain

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जैन रामायण की वाचना : जैसे ही वैराग्य उत्पन्न हो, मुनि बन जाओ

निर्मल सेवा सदन छीपीटोला, आगरा में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य मुनि श्री 108 साक्ष्य सागर महाराज, मुनि श्री 108 योग्य सागर महाराज, मुनि...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन : गुरु ने की भक्तामर 31वें काव्य की व्याख्या

डबरा। आरोग्यमय वर्षायोग समिति द्वारा गणाचार्य 108 श्री विराग सागर जी मुनिराज का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन करके बड़े ही भक्ति भाव से किया। इसके बाद मेडिटेशन...

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सकल दिगम्बर जैन समाज युवा वेलफेयर सोसायटी की ओर से आयोजन : स्वतंत्रता दिवस-रक्षाबंधन के अवसर सर्वसमाज का दो दिवसीय सावन मेला

रक्षाबंधन और स्वाधीनता दिवस के अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज युवा वेलफेयर सोसायटी, इंदौर ने दो दिवसीय सर्वसमाज का सावन मेला का आयोजन रखा है। इसमें आमजन हेतु...

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मुनि सुधासागर महाराज का रहा सानिध्य : श्रावक संस्कार शिक्षण शिविर के लिए बैठक आयोजित

मुनिपुंगव सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में आगामी दसलक्षण पर्व पर 19 सितम्बर से 29 सितम्बर के मध्य आगरा में आयोजित होने वाले श्रावक संस्कार शिक्षण शिविर को सफल...

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जैन युवा परिषद मानसरोवर संभाग की ओर से आयोजन : धर्म पथ प्रभावना यात्रा सम्पन्न

जैन युवा परिषद मानसरोवर संभाग की धर्म पथ प्रभावना यात्रा का आयोजन सानंद संपन्न हुआ। धर्म पथ प्रभावना यात्रा में जयपुर में चल रहे चातुर्मास में संतों व...

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गणधर विलय महामंत्र पर प्रवचन : ज्योतिष का संपूर्ण वर्णन जैन धर्म में सूक्ष्मता के साथ किया है-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

श्री 1008 मुनिसुव्रत नाथ दिगम्बर जैन मंदिर, स्मृति नगर में णमो अट्टंग महानिमित्त कुसलणं मंत्र पर व्याख्यान देते हुए अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा कि...

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जैन समाज राजनीति में आगे बढ़े : जैन राजनीतिक चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने किया आह्वान

जैन समाज हमेशा से राष्ट्र हित में काम करता रहा है। प्रथम लोकसभा में जैन समाज से 35 से 40 सांसद जैन समाज थे। संविधान सभा में भी जैन समाज कें 5 जन सम्मलित थे।...

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ईर्ष्या मनुष्य के चरित्र में लाभ की जगह हानि का बीज बोती है : आर्यिका विभाश्री ने ईर्ष्या भाव के बारे में बताया 

व्यक्ति को जीवन में कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। ईर्ष्यालु व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता, वह कभी भी गुणों को ग्रहण नहीं करता। दूसरों का सुख वह देख नहीं सकता है...

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भव्यछपक आसन्न सागर की हुई समाधि : पूरे मुनिसंघ ने उनकी सल्लेखना समाधि में धर्म आराधना कराई।

आर्यिका दृढमतिमाताजी, ब्र. सविता दीदी और ब्र. अनीता दीदी के गृहस्थ जीवन के पिता 94 वर्षीय गुलाबचंद जैन पटना वालों की भाग्योदय तीर्थ के संत भवन में 26 दिन की...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : सभी पुस्तकों, अध्यात्म एवं पठन-पाठन का मुख्य उद्देश्य हमारी आत्मा का उत्थान है – मुक्ति दर्शना माताजी 

 पार्श्व प्रधान पाठशाला में विराजित साध्वी श्री मुक्ति दर्शना माताजी ने अपने प्रवचन में धर्म ग्रंथ में धर्म की परिभाषा का विस्तृत विवेचन करते हुए बताया कि...

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